Sunday, June 11, 2017

महफ़िल

महफ़िल में क्या होता है, ये हम कैसे तुम्हें बतायें,
ढ़ेर-ढ़ेर और लम्बी बातें अनथक, अपलक बोले जायें।

चार लोग जब साथ मिलें तब मस्ती में कुछ बोलें गायें,
जाने कब-कब; कैसे-कैसे महफ़िल जाने कहाँ बनायें।

उलझी गुत्थी को सुलझायें, राज़ दिलों के बोलें जायें,
बंद किताबों के हर पन्ने एक-एक कर खोलें जायें।

कभी अरस्तू; कभी कबीरा, कभी हीर; ग़ालिब कभी आयें,
महफ़िल की वो बात-बतक्कड़ स्मृति से जाने न पाये।

आओ बैठो साथ मिलो कभी महफ़िल अपनी कहीं बनायें
न जाने कब लौट के आयें महफ़िल के ये गीत-कथायें।

- अच्युत शुक्ल

गर्मी की बारिश

गर्मी की बारिश

गर्मी की है पहली बारिश,
चिंकी और चुन्नू की गुज़ारिश ।

अम्मा हमको खेल लेन दो,
बारिश में तनिक भीग लेन दो,
हम ऊधम नहीं मचायेंगे,
बस थोड़ी देर नहायेंगे,
पानी मे नाव चलायेंगे,
छप-छप पानी छपकायेंगे।

न-न बिटवा नहीं-नहीं,
बारिश में भीगना नहीं,
सर्दी जुकाम हो जायेंगे,
फिर तुमको बड़ा सतायेंगे।

पर चिंकी और चुन्नू दो बच्चे,
मन के अच्छे सच्चे बच्चे,
बोले- अम्मा मेरी प्यारी अम्मा,
हम दोनों दो छोटे बच्चे,
कितनी देर नहायेंगे ?
पल में जाकर, वहाँ खेलकर,
पल भर में आ जायेंगे।

अम्मा को फिर दया आ गयी,
बच्चों की भी बांछें खिल गयीं।
अम्मा तब बोलीं बच्चों से-
उधम नहीं मचाना बच्चों,
थोड़ी देर नहाना बच्चों,
पानी मे नाव चलाना बच्चों,
छप-छप पानी छपकाना बच्चों।

गर्मी की है पहली बारिश....

- अच्युत शुक्ल