Sunday, June 5, 2016

गोदान से...

वैवाहिक जीवन के प्रभात में लालसा अपनी गुलाबी मादकता के साथ उदय होती है और ह्रदय के सारे आकाश को अपने माधुर्य की सुनहरी किरणों से रंजित कर देती है। फिर मध्याह्न का प्रखर ताप आता है, क्षण क्षण पर बगूले उठते हैं और पृथ्वी कांपने लगती है। लालसा का सुनहरा आवरण हट जाता है और वास्तविकता अपने नग्न रूप में सामने आ खड़ी होती है। उसके बाद विश्राममय संध्या आती है, शीतल और शांत, जब हम थके हुए पथिकों की भांति दिन भर की यात्रा का वृतांत कहते और सुनते हैं, तटस्थ भाव से, मनो हम किसी ऊँचे शिखर पर जा बैठे हैं, जहाँ नीचे का जन-रव हम तक नहीं पहुँचता।

( गोदान से.... )

Saturday, June 4, 2016

आरोहण

नव दिनकर का नया सवेरा तुझको राह दिखायेगा,
एक कदम तो बढ़ा रे साथी जग भी साथ में आएगा।

गर तू निद्रामग्न रहा तो पिछड़ बहुत तू जायेगा,
स्वप्नलोक के भंवरजाल में फंसकर तू रह जायेगा।

कितना चलना तुझे है बाकी कितना पाना बाकी है,
अन्धकारमय इस जीवन में उजियाला लाना बाकी है

हासिल कर अपने मुकाम तू खुद अपने दम पर,
आश्रय की पतवार को छोड़ लहरों में अब तू उतर।

तेरी मेहनत कभी तो तुझको रंग नया दिखलाएगी
इस बंजर धरती में भी कभी उपवन नया खिलायेगी।

मोती मोती माला होती बूँद बूँद भरता है घड़ा
वैसे थोडा थोडा करके मंजिल पे तू आ हो खड़ा।

परवाह न कल की तू कर वर्तमान में आगे बढ़,
जो बीत गया सो बीत गया अब कोई नयी कहानी गढ़।

- अच्युत

Wednesday, June 1, 2016

यादें

'यादें' - एक शब्द जो ज़ेहन में आते ही न जाने कितनी सुखद, कितनी मधुरिम, कितनी दुखद और कितनी कड़वी छवियाँ उकेर देता है।पर इसको शब्द कहने से यक दायरा सीमित नहीं हो जाता याद शब्द स्वयं में एक किताब है - हमारे अच्छे बुरे पलों की।  हम हर मिनट , हर सेकंड एक नयी याद सँजोये चलते हैं। कुछ पल अच्छी यादें बन जातें हैं तो कुछ बुरी। पर जहाँ तक बात इंसानी फ़ितरत की है तो ज़नाब वो कुछ ऐसी है की अच्छी यादें ही याद रखना चाहती है, और ये बिल्कुल सही बात भी है कि इतने तनावग्रस्त जीवन में शायद ही ख़ुशी के दो चार लम्हे ही आ पाते हैं और दुःख की घड़ी में उन्ही को याद करके हम अपने इस नादान दिल को बहला सकते है। शायद ये इतनी छोटी सी ज़िन्दगी हर किसी से नफरत के लिए नाकाफ़ी है।

यादें किसी दिखावे, किसी प्रदर्शन की मोहताज़ नहीं होती। यादें सिर्फ और सिर्फ यादें होती हैं। कोई तस्वीर रखता है तो कोई आवाज़, पर सबसे सुन्दर याद तो दिल में बसी होती है जिसे न तो किसी तस्वीर की ज़रूरत होती, न आवाज़ की और न ही शब्दों की। वो तो इन तीनों का मेल होती है। जो दिल में बसते हैं उनके लिए दिखावे की कोई ज़रूरत नहीं पड़ती।

याद रखिये यादें केवल और केवल यादें होती हैं। उन्हें यादें ही बना रहने दीजिये। पूरे करने ही हैं तो सपने पूरे कीजिये। यादों के साथ छेड़छाड़ मत करिये।

यादों का मतलब समझते हैं न आप....

यादों से कीमती कुछ नहीं मिला मुझको
यादों से जीना सीखा है, यादों से ही मरना।