'यादें' - एक शब्द जो ज़ेहन में आते ही न जाने कितनी सुखद, कितनी मधुरिम, कितनी दुखद और कितनी कड़वी छवियाँ उकेर देता है।पर इसको शब्द कहने से यक दायरा सीमित नहीं हो जाता याद शब्द स्वयं में एक किताब है - हमारे अच्छे बुरे पलों की। हम हर मिनट , हर सेकंड एक नयी याद सँजोये चलते हैं। कुछ पल अच्छी यादें बन जातें हैं तो कुछ बुरी। पर जहाँ तक बात इंसानी फ़ितरत की है तो ज़नाब वो कुछ ऐसी है की अच्छी यादें ही याद रखना चाहती है, और ये बिल्कुल सही बात भी है कि इतने तनावग्रस्त जीवन में शायद ही ख़ुशी के दो चार लम्हे ही आ पाते हैं और दुःख की घड़ी में उन्ही को याद करके हम अपने इस नादान दिल को बहला सकते है। शायद ये इतनी छोटी सी ज़िन्दगी हर किसी से नफरत के लिए नाकाफ़ी है।
यादें किसी दिखावे, किसी प्रदर्शन की मोहताज़ नहीं होती। यादें सिर्फ और सिर्फ यादें होती हैं। कोई तस्वीर रखता है तो कोई आवाज़, पर सबसे सुन्दर याद तो दिल में बसी होती है जिसे न तो किसी तस्वीर की ज़रूरत होती, न आवाज़ की और न ही शब्दों की। वो तो इन तीनों का मेल होती है। जो दिल में बसते हैं उनके लिए दिखावे की कोई ज़रूरत नहीं पड़ती।
याद रखिये यादें केवल और केवल यादें होती हैं। उन्हें यादें ही बना रहने दीजिये। पूरे करने ही हैं तो सपने पूरे कीजिये। यादों के साथ छेड़छाड़ मत करिये।
यादों का मतलब समझते हैं न आप....
यादों से कीमती कुछ नहीं मिला मुझको
यादों से जीना सीखा है, यादों से ही मरना।
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